Shiv Puran Katha in Hindi
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शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। इसमें भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है। शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है।
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राजा अनरण्य और पद्मा विवाह की कथा - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 33 01.06.2026 6минशिव पुराण के तैंतीसवें अध्याय में जानिए राजा अनरण्य, उनकी पुत्री पद्मा और ऋषि पिप्पलाद की अद्भुत कथा। इस अध्याय में धर्म, त्याग, कुल रक्षा और भाग्य की गहरी शिक्षा मिलती है। सुनिए शिव पुराण अध्याय 33 हिंदी में और जानिए कैसे राजा अनरण्य ने अपने कुल की रक्षा के लिए कठिन निर्णय लिया।✨ इस वीडियो में:राजा अनरण्य की कथादेवी पद्मा का विवाहऋषि पिप्पलाद की कहानीधर्म और त्याग का महत्वशिव पुराण हिंदी कथाअगर आपको शिव पुराण की कथाएं पसंद हैं तो वीडियो को Like, Share और Channel Subscribe जरूर करें।#ShivPuran #ShivMahapuran #Adhyay33 #ShivPuranHindi #PippaladRishi #PadmaKatha #Mahadev #ShivKatha #HindiKahani #Bhakti
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वशिष्ठ मुनि का उपदेश - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 32 24.05.2026 6минशिव पुराण के बत्तीसवें अध्याय में महर्षि वशिष्ठ हिमालय को भगवान शिव के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराते हैं। इस अध्याय में शिव-पार्वती विवाह का महत्व, भगवान शिव की महिमा और देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है।महर्षि वशिष्ठ बताते हैं कि भगवान शिव स्वयं सृष्टि के पालनकर्ता और परमेश्वर हैं तथा देवी पार्वती आदिशक्ति हैं। यह अध्याय शिवभक्तों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक है।
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सप्तऋषियों ने हिमालय और मैना को समझाया | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 31 17.05.2026 9минशिव पुराण के इकतीसवें अध्याय में सप्तऋषियों का हिमालय के घर आगमन और देवी मैना को समझाने की कथा वर्णित है। इस अध्याय में सप्तऋषि हिमालय और मैना को भगवान शिव की महिमा बताते हैं और समझाते हैं कि पार्वती का विवाह शिवजी से ही होना चाहिए।इस कथा में तारकासुर के अत्याचार, शिव-पुत्र की आवश्यकता, पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती विवाह के दिव्य कारण का वर्णन मिलता है।shiv puran adhyay 31, shiv puran chapter 31 hindi, सप्तऋषियों का आगमन, हिमालय को समझाना, शिव पार्वती विवाह, parvati vivah katha, shiv puran hindi, shiv katha hindi, mahadev katha, saptarishi shiv puran, hindu mythology hindi, sanatan dharm katha#ShivPuran #Adhyay31 #Saptarishi #ShivParvati #Mahadev #ParvatiVivah #ShivKatha #SanatanDharma
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ब्राह्मण वेष में पार्वती के घर गए शिव | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 30 11.05.2026 5минशिव पुराण के तीसवें अध्याय में भगवान शिव ब्राह्मण वेष धारण करके शैलराज हिमालय के घर जाते हैं। वहाँ वे हिमालय को पार्वती और शिव विवाह के विषय में परखते हैं और शिवजी के गुण-दोषों की चर्चा करते हुए हिमालय की परीक्षा लेते हैं।इस अध्याय में भगवान शिव की लीला, हिमालय की भक्ति, पार्वती की पहचान और शिव-पार्वती विवाह से पहले की दिव्य परीक्षा का वर्णन मिलता है।
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शिवजी द्वारा हिमालय से पार्वती को मांगना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 29 26.04.2026 7минशिव पुराण के उनतीसवें अध्याय में भगवान शिव द्वारा हिमालय से माता पार्वती का हाथ मांगने की अद्भुत कथा वर्णित है। इस अध्याय में शिवजी की लीला, उनकी माया और पार्वती जी के प्रति उनके दिव्य प्रेम का सुंदर वर्णन मिलता है।इस कथा में बताया गया है कि कैसे भगवान शिव नट रूप धारण करके हिमालय और मैना की परीक्षा लेते हैं, और अंत में उनके मन में पश्चाताप उत्पन्न होता है। यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और भगवान की लीला को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।🙏 यदि आप शिव पुराण की सम्पूर्ण कथा सुनना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक देखें।
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शिव-पार्वती संवाद और विवाह का निर्णय | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 28 19.04.2026 5минशिव पुराण के अट्ठाईसवें अध्याय में भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण संवाद का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी अपने पूर्व जन्म, तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा को स्पष्ट करती हैं।भगवान शिव इस संवाद में सृष्टि के गहरे रहस्य, प्रकृति और पुरुष के संबंध, तथा माया और ब्रह्म के तत्व को समझाते हैं। अंततः वे पार्वती जी की इच्छा स्वीकार करते हैं और विवाह के लिए सहमति प्रदान करते हैं।✨ इस अध्याय की मुख्य बातें:पार्वती जी की अटूट भक्ति और प्रेमशिव का आध्यात्मिक ज्ञान और उपदेशप्रकृति और परमात्मा का संबंधशिव-पार्वती विवाह का निर्णय📖 इस वीडियो में आपको मिलेगा:✔️ पूरा अध्याय सरल हिंदी में✔️ गहन आध्यात्मिक अर्थ✔️ जीवन से जुड़ी सीख🙏 वीडियो पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE जरूर करें।
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पार्वती जी का क्रोध और शिव का प्रकट होना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 27 12.04.2026 8минशिव पुराण के सत्ताईसवें अध्याय में देवी पार्वती के अद्भुत धैर्य, भक्ति और भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में पार्वती जी एक ब्राह्मण के रूप में आए भगवान शिव की परीक्षा के दौरान उनके अपमान को सहन नहीं करतीं और क्रोध में उन्हें फटकारती हैं।इसी क्षण भगवान शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट होते हैं और पार्वती जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी स्वीकार करने का वचन देते हैं।यह अध्याय हमें सिखाता है:सच्ची भक्ति क्या होती हैभगवान की परीक्षा और भक्त की दृढ़ताशिव-पार्वती मिलन का दिव्य रहस्य📖 इस वीडियो में आपको मिलेगा:✔️ पूरा अध्याय सरल हिंदी में✔️ गहरा आध्यात्मिक अर्थ✔️ भक्ति और धैर्य का संदेश🙏 वीडियो पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE जरूर करें।
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पार्वती को शिवजी से दूर रहने का आदेश | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 26 05.04.2026 7минशिव पुराण के छब्बीसवें अध्याय में भगवान शिव, ब्राह्मण के वेश में माता पार्वती की परीक्षा लेते हैं। वे पार्वती को समझाने का प्रयास करते हैं कि शिवजी उनके योग्य पति नहीं हैं और उन्हें शिव से दूर रहना चाहिए।इस अध्याय में शिवजी अपने ही स्वरूप की निंदा करते हुए पार्वती की भक्ति और दृढ़ता को परखते हैं। पार्वती देवी इन सब बातों को सुनकर भी अपने संकल्प से विचलित नहीं होतीं।
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शिवजी ने ली पार्वती की तपस्या की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 25 30.03.2026 5минशिव पुराण के पच्चीसवें अध्याय में भगवान शिव स्वयं ब्राह्मण रूप धारण कर देवी पार्वती की कठोर तपस्या की परीक्षा लेने आते हैं। पार्वती जी अपने पूर्व जन्म (सती) का स्मरण करती हैं और बताती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में प्राप्त करना चाहती हैं।तीन हजार वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भी जब शिवजी प्रकट नहीं होते, तो पार्वती अग्नि में प्रवेश करने का निश्चय करती हैं। किंतु उनकी तपस्या की शक्ति से अग्नि भी ठंडी हो जाती है। तब शिवजी उनकी निष्ठा और दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेते हैं।यह अध्याय भक्ति, धैर्य, तपस्या और अटूट प्रेम का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।📌 इस वीडियो में जानिए:शिवजी ने ब्राह्मण रूप क्यों धारण किया?पार्वती ने अग्नि में प्रवेश क्यों किया?तपस्या की सच्ची परीक्षा क्या होती है?शिव-पार्वती मिलन का आध्यात्मिक महत्व🙏 यदि आपको शिव पुराण की यह कथा पसंद आए तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
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सप्तऋषियों ने ली पार्वती की परीक्षा | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 24 22.03.2026 9минशिव पुराण के चौबीसवें अध्याय में सप्तऋषि देवी पार्वती की तपस्या की परीक्षा लेते हैं। वे नारद मुनि की निंदा करते हुए पार्वती को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं।लेकिन देवी पार्वती अटल विश्वास के साथ कहती हैं कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में स्वीकार करेंगी।यह अध्याय गुरु भक्ति, दृढ़ निश्चय और अटूट श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण है।📌 इस वीडियो में जानिए:सप्तऋषि क्यों आए?नारद की निंदा क्यों की गई?पार्वती की निष्ठा कैसी थी?
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देवताओं ने शिव से किया विवाह का अनुरोध | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 23 16.03.2026 9минशिव पुराण के तेईसवें अध्याय में देवता भगवान शिव से पार्वती जी से विवाह करने का निवेदन करते हैं।भगवान शिव विवाह को एक बंधन बताते हैं और समझाते हैं कि कैसे काम, क्रोध और मोह तपस्या में बाधा डालते हैं।फिर भी भक्तों की रक्षा के लिए वे पार्वती से विवाह करने का निर्णय लेते हैं।📌 इस वीडियो में जानिए:शिव विवाह को बंधन क्यों कहते हैं?शिव का वैराग्य भाव क्या है?भक्तों के लिए शिव क्या त्याग करते हैं?
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देवताओं का शिवजी के पास जाना | शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 22 09.03.2026 6минशिव पुराण के बाईसवें अध्याय में देवताओं पर आए संकट का वर्णन मिलता है। तारकासुर के अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव की शरण में जाते हैं।भगवान विष्णु, ब्रह्मा और अन्य देवताओं के साथ मिलकर शिवजी से प्रार्थना की जाती है कि वे पार्वती जी से विवाह करें ताकि उनके पुत्र द्वारा तारकासुर का वध हो सके।यह अध्याय भक्ति, श्रद्धा और ईश्वर की शरणागति का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।📌 इस वीडियो में जानिए:तारकासुर कौन था?देवता क्यों भयभीत हुए?शिवजी ने क्या उत्तर दिया?शिव विवाह का रहस्य क्या है?🙏 वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
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पार्वती की तपस्या - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता | अध्याय 21 01.03.2026 5минशिव पुराण का इक्कीसवां अध्याय देवी पार्वती की अद्भुत, कठोर और अलौकिक तपस्या का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के संकल्प के साथ पार्वती सांसारिक सुखों का त्याग कर गंगोत्री तीर्थ में घोर तपस्या आरंभ करती हैं।वे पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जप करती हैं। फलाहार से प्रारंभ होकर पत्तों के त्याग और अंततः निराहार साधना तक उनकी तपस्या बढ़ती जाती है। भोजन त्याग देने के कारण देवताओं द्वारा उन्हें ‘अपर्णा’ नाम दिया जाता है।तीन हजार वर्षों तक की गई यह तपस्या न केवल ऋषि-मुनियों के लिए आश्चर्यजनक थी, बल्कि संपूर्ण प्रकृति को भी पवित्र और दिव्य बना देती है। यह अध्याय भक्ति, संयम, धैर्य और शिव-प्राप्ति के लिए आत्मसमर्पण का दिव्य संदेश देता है।
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शिवजी के वियोग में पार्वती का शोक और तपस्या का आरंभ - शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 20 22.02.2026 6минशिव पुराण का बीसवां अध्याय देवी पार्वती के गहन शोक, विरह और आत्मचिंतन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन प्रस्तुत करता है। कामदेव के भस्म होने के बाद पार्वती का हृदय शिव-वियोग से व्याकुल हो उठता है। यह अध्याय बताता है कि किस प्रकार देवी पार्वती सांसारिक सुखों से विरक्त होकर भगवान शिव को पुनः प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या का संकल्प लेती हैं।इस अध्याय में भक्ति, वैराग्य, आत्मसंयम और तप की महिमा का विस्तार से वर्णन है, जो साधकों को यह सिखाता है कि अहंकार के त्याग और शुद्ध भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। बीसवां अध्याय शिव-भक्तों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है।
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शिव क्रोधाग्नि की शांति- शिव पुराण - कामदेव भस्म कथा | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 19 15.02.2026 2минशिव पुराण का उन्नीसवाँ अध्याय बताता है कि कैसे भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उत्पन्न क्रोधाग्नि से कामदेव भस्म हो गए और ब्रह्मा जी ने उस अग्नि को समुद्र में सुरक्षित रखकर सृष्टि की रक्षा की। यह अध्याय शिव के रौद्र और करुणामय स्वरूप का अद्भुत वर्णन करता है।शिव पुराण अध्याय 19शिव क्रोधाग्नि की शांतिकामदेव भस्म कथाभगवान शिव तीसरा नेत्रशिव पुराण हिंदीशिव क्रोध कथासमुद्र में क्रोधाग्निब्रह्मा और शिव कथा
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कामदेव का भस्म होना - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 18 08.02.2026 7минशिव पुराण का अठारहवाँ अध्याय एक अत्यंत मार्मिक और दिव्य प्रसंग प्रस्तुत करता है, जिसमें कामदेव भगवान शिव को मोहित करने के प्रयास में उनके तीसरे नेत्र की अग्नि से भस्म हो जाते हैं। इस अध्याय में भगवान शिव की कठोर तपस्या, कामदेव द्वारा चलाए गए बाणों का निष्फल होना, रति का विलाप तथा देवताओं की करुण प्रार्थना का विस्तार से वर्णन मिलता है। यह कथा वैराग्य, संयम, तपस्या और अहंकार के नाश का गहरा आध्यात्मिक संदेश देती है। शिव पुराण का यह अध्याय बताता है कि ब्रह्मांड की शक्तियाँ भी भगवान शिव की इच्छा और तप के सामने क्षीण हैं। कामदेव का भस्म होना केवल विनाश नहीं, बल्कि धर्म और संतुलन की स्थापना का प्रतीक है।seoशिव पुराण अठारहवाँ अध्याय, कामदेव का भस्म होना, कामदेव शिव कथा, शिव तीसरा नेत्र, रति विलाप कथा, शिव तपस्या प्रसंग, कामदेव भस्म कथा, शिव पुराण हिंदी
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कामदेव का शिव को मोहित करने के लिए प्रयाण | शिव पुराण | श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 17 02.02.2026 4минशिव पुराण का सत्रहवाँ अध्याय कामदेव के उस महत्वपूर्ण प्रयाण का वर्णन करता है, जिसमें देवताओं के कष्ट निवारण हेतु वे भगवान शिव को मोहित करने का प्रयास करते हैं। इस अध्याय में तारकासुर के अत्याचार, देवी पार्वती की तपस्या, इंद्रदेव की चिंता तथा शिव-पार्वती विवाह की पृष्ठभूमि का गूढ़ आध्यात्मिक विवरण मिलता है।--Shiv Puran Adhyay 17 में कामदेव को देवताओं द्वारा शिव को मोहित करने का कार्य सौंपा जाता है, ताकि तारकासुर का वध संभव हो सके। यह अध्याय भक्ति, तपस्या, योग, वैराग्य और शिव-पार्वती के दिव्य मिलन की भूमिका को गहराई से प्रस्तुत करता है।
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तारक का स्वर्ग त्याग शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 16 25.01.2026 5минशिव पुराण का षोडशवाँ अध्याय तारकासुर के पतन की दिशा में एक निर्णायक मोड़ प्रस्तुत करता है। भगवान शिव के आदेश से तारकासुर स्वर्ग का त्याग करता है और पृथ्वी पर शोनित नगर में शासन प्रारंभ करता है। देवता पुनः स्वर्गलोक लौटते हैं और इंद्र के नेतृत्व में स्वर्ग का संतुलन स्थापित होता है।यह अध्याय अहंकार, वरदान के दुरुपयोग और धर्म के मार्ग से विचलन के परिणामों को स्पष्ट करता है। शिव पुराण की यह कथा दर्शाती है कि जब अधर्म बढ़ता है, तब स्वयं महादेव व्यवस्था को पुनः संतुलित करते हैं। यह अध्याय भक्तों को धैर्य, आज्ञाकारिता और धर्म के महत्व का गहन बोध कराता है।शिव पुराण कथा के इस अध्याय का श्रवण करने से भक्तों को जीवन में विवेक, संयम और ईश्वर की लीला को समझने की प्रेरणा मिलती है।
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तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता -अध्याय 15 18.01.2026 5минशिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा। यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्म का अंत निश्चित है। शिव पुराण का यह अध्याय भक्तों को धर्म, संयम और शिव तत्व के महत्व का बोध कराता है।
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तारकासुर का जन्म व उसका तप - शिव पुराण - श्रीरुद्र संहिता - अध्याय 14 11.01.2026 5минशिव पुराण का पंद्रहवाँ अध्याय तारकासुर के जन्म, उसके भयानक तप और देवताओं पर उसके बढ़ते अत्याचार का विस्तृत वर्णन करता है। इस अध्याय में बताया गया है कि कैसे कठोर तपस्या से तारकासुर ने अपार शक्तियाँ प्राप्त कीं, देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सम्पूर्ण त्रिलोक भयभीत हो उठा। यह अध्याय अहंकार, शक्ति और तप के दुरुपयोग के गहरे आध्यात्मिक संदेश को उजागर करता है तथा यह दर्शाता है कि अधर्म का अंत निश्चित है। शिव पुराण का यह अध्याय भक्तों को धर्म, संयम और शिव तत्व के महत्व का बोध कराता है।शिव पुराण पंद्रहवाँ अध्याय, तारकासुर का जन्म, तारकासुर तपस्या, तारकासुर कथा, शिव पुराण तारकासुर, देवताओं पर तारकासुर का अत्याचार, तारकासुर वरदान कथा, शिव पुराण हिंदी कथा
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